चण्डीगढ़। सिर्फ 26 वर्ष की उम्र में, ओजस्वी दत्ता, जोकि चण्डीगढ़ के डीएवी पब्लिक स्कूल, सेक्टर 8 और एसडी कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं, अमेरिका के लुइसियाना बायोमेडिकल रिसर्च नेटवर्क (एलबीआरएन) के नवीनीकरण में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से इस नेटवर्क को हाल ही में यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जनरल मेडिकल साइंसेज (एनआईजीएमएस) द्वारा 20.3 मिलियन डॉलर्स (लगभग ₹169 करोड़) की फंडिंग प्रदान की गई है।
दत्ता वर्तमान में लुइसियाना, अमेरिका में बायोटेक्नोलॉजी और मॉलिक्यूलर मेडिसिन डिवीजन (बायो एमएमईडी) में असिस्टेंट डायरेक्टर और एलबीआरएन के प्रोग्राम मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने एलबीआरएन के प्रतिस्पर्धात्मक नवीनीकरण आवेदन, एलबीआरएन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म के निर्माण और कम्प्यूटेशनल मॉलिक्यूलर मेडिसिन में मास्टर डिग्री के विकास में अहम भूमिका निभाई है।
वे अपने सहयोगियों ब्रैटी लीरी, डॉ. हरिकृष्णन मोहन व डॉ. सीतारामा जोइस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और एलएसयू के केन सेंटर के साथ भागीदारी में अमेरिका के हाई स्कूल शिक्षकों और छात्रों को वर्चुअल टीचिंग भी प्रदान कर रहे हैं।
ओजस्वी दत्ता के नेतृत्व में, अब एलबीआरएन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म को भारतीय विश्वविद्यालयों और स्कूलों तक विस्तार दिया जाएगा
एलबीआरएन के निदेशक और एलएसयू स्कूल ऑफ वेटरनरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. गस कौसौलास ने दत्ता की सराहना करते हुए कहा कि उनके एलएसयूमें अपने 36 वर्षों के करियर में ओजस्वी दत्ता सबसे बेहतरीन कर्मचारी रहे हैं। उनकी कार्यकुशलता और नेतृत्व अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि ओजस्वी दत्ता के नेतृत्व में, अब एलबीआरएन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म को भारतीय विश्वविद्यालयों और स्कूलों तक विस्तार दिया जाएगा, जहां बायोइन्फॉर्मेटिक्स, डेटा साइंस और बायोमेडिकल रिसर्च में प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र कोर्स, और कुछ मुफ्त पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाएंगे।
दत्ता ने कहा कि वे वैश्विक मंच पर चण्डीगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए गर्व महसूस करते हैं। यह प्लेटफॉर्म भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए द्वार खोलेगा और उन्हें बायोमेडिकल साइंस में अत्याधुनिक संसाधनों और वैश्विक सहयोग से जोड़ने का काम करेगा।