हल्दिया के कुकड़ाहाटी घाट पर बड़ा हादसा टला : फर्श फटने से पैसेंजर लांच पानी में डूबी, 50 यात्री बाल-बाल बचे

देश , NewsAbhiAbhiUpdated 07.08.25 IST
 हल्दिया के कुकड़ाहाटी घाट पर बड़ा हादसा टला : फर्श फटने से पैसेंजर लांच पानी में डूबी, 50 यात्री बाल-बाल बचे
हल्दिया। हल्दिया के कुकड़ाहाटी फेरीघाट पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर की ओर जा रही एक पैसेंजर लांच के फर्श में अचानक दरार आ गई, जिससे पानी तेजी से लांच के भीतर घुसने लगा। देखते ही देखते लांच एक ओर झुक गई और धीरे-धीरे डूबने लगी। घटना के वक्त लांच में लगभग 50 यात्री सवार थे। फर्श फटते ही मची चीख-पुकार, घाट के पास होने से टली बड़ी त्रासदी
स्थानीय चश्मदीदों के मुताबिक, घटना शाम लगभग 6 बजे उस समय हुई जब लांच कुकड़ाहाटी फेरीघाट से कुछ ही दूरी पर टर्न ले रही थी। उसी दौरान लांच के निचले हिस्से, जिसे स्थानीय भाषा में पाटातन कहा जाता है, में तेज धमाके जैसी आवाज़ के साथ छेद हो गया।
कुछ ही क्षणों में पानी लांच के भीतर भरने लगा और वह एक ओर झुक गई। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, कई लोग गिर पड़े, और कुछ लोग जान बचाने के लिए किनारे की ओर कूदने को भी तैयार हो गए।
स्थानीय लोगों की सतर्कता से टले जान-माल के नुकसान सौभाग्य से हादसा फेरीघाट के बिलकुल पास हुआ, जिससे घाट पर मौजूद अन्य नाविकों, घाट कर्मियों और स्थानीय लोगों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। लांच से सभी यात्रियों को एक-एक करके सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फेरीघाट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों की तत्परता की सराहना हो रही है। किसी भी यात्री की मौत या गंभीर चोट की खबर नहीं है, लेकिन लांच पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है और फिलहाल उपयोग से बाहर है। “बीच नदी में होता हादसा, तो सब खत्म हो जाता” – यात्रियों की दहशत लांच में सवार कुछ यात्रियों ने हादसे के बाद मीडिया से बातचीत में अपनी आपबीती साझा की। एक यात्री, गौतम मंडल ने कहा,
“हमारे सामने लांच झुकती गई, और पानी भरता गया। हम चिल्ला रहे थे, किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। अगर ये फेरीघाट से दूर होता, तो शायद हम में से कोई भी ज़िंदा नहीं बचता।”
दूसरे यात्री प्रमिला दास ने बताया कि लांच पहले से ही जर्जर हालत में थी।
“पिछली बार भी इंजन बंद हो गया था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। लोग रोज़ अपनी जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं।”
अब तक कोई सरकारी प्रतिक्रिया नहीं, तकनीकी जांच पर उठे सवाल
घटना के कई घंटे बाद तक न तो किसी प्रशासनिक अधिकारी और न ही परिवहन विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान आया है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि यह हादसा सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर लांच की तकनीकी जांच और मरम्मत की गई होती, तो यह हादसा टल सकता था। पश्चिम बंगाल में जल परिवहन लाखों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। लेकिन इस घटना ने फिर एक बार सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या हमारी फेरी सेवाएं सुरक्षित हैं?
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच की मांग तेज घटना की जानकारी मिलते ही विपक्षी दलों के कुछ स्थानीय नेताओं ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। एक नेता ने कहा, “हर बार हादसे के बाद जांच की बात होती है, लेकिन नतीजा कभी सामने नहीं आता। गरीब जनता को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।”
 

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