अमावस्या के साये में चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष, NewsAbhiAbhiUpdated 17.03.26 IST
अमावस्या के साये में चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

 अमावस्या के साये में चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 इस बार एक बेहद खास और दुर्लभ संयोग के साथ शुरू होने जा रही है, जो इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है। इस वर्ष 19 मार्च 2026 को अमावस्या और प्रतिपदा तिथि का मेल हो रहा है, जिससे धार्मिक दृष्टि से यह दिन अत्यंत विशेष बन गया है। सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होने के कारण सुबह के समय अमावस्या से जुड़े स्नान-दान और कर्मकांड किए जाएंगे, वहीं इसी दिन मां दुर्गा का आगमन भी माना जाएगा। 72 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसा संयोग लगभग 72 साल बाद बन रहा है, जब चैत्र नवरात्रि का आरंभ अमावस्या के प्रभाव में हो रहा है। इस कारण श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष पुण्यदायक माना जा रहा है। एक ही दिन अमावस्या स्नान-दान और मां अंबे के स्वागत का अवसर मिलना धार्मिक रूप से बेहद शुभ माना जाता है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। 19 मार्च 2026 को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से 09 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 12 बजकर 09 मिनट तक रहेगा, जो उन लोगों के लिए उपयुक्त रहेगा जो मुख्य मुहूर्त में स्थापना नहीं कर पाते हैं। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की सुबह 06 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च 2026 की सुबह 04 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। कलश स्थापना की सरल विधि नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले घर की उत्तर-पूर्व दिशा को साफ करके स्थान निर्धारित करें, जिसे ईशान कोण कहा जाता है और इसे पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसके बाद एक पात्र में शुद्ध मिट्टी डालकर उसमें जौ बोए जाते हैं, जो समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माने जाते हैं। फिर तांबे या मिट्टी का कलश लेकर उसके मुख पर कलावा बांधा जाता है और उसमें जल, गंगाजल, सुपारी, अक्षत और सिक्का डाला जाता है। कलश के ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल स्थापित किया जाता है, जिसे लाल कपड़े में लपेटा जाता है। इसके बाद विधिपूर्वक मां दुर्गा का ध्यान कर संकल्प लिया जाता है और नौ दिनों तक नियमित रूप से पूजा की जाती है। धार्मिक महत्व चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में शक्ति उपासना का प्रमुख पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान घटस्थापना का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसे देवी के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस बार अमावस्या के साथ इसकी शुरुआत होने से इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।

Recommended

Follow Us