नाच ना जाने आँगन टेढ़ा - अपनी वित्तीय विफलता छिपाने के लिए केंद्र को दोष दे रही हिमाचल सरकार : टंडन

देश , NewsAbhiAbhiUpdated 12.02.26 IST
 नाच ना जाने आँगन टेढ़ा - अपनी वित्तीय विफलता छिपाने के लिए केंद्र को दोष दे रही हिमाचल सरकार : टंडन
शिमला। भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी वित्तीय अव्यवस्था, बढ़ते कर्ज, राजकोषीय घाटे और गलत प्राथमिकताओं को छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर निराधार आरोप लगा रही है। टंडन ने कहा कि यह स्थिति “नाच ना जाने आँगन टेढ़ा” जैसी है, जहां अपनी प्रशासनिक और वित्तीय विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ा जा रहा है। संजय टंडन ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) का चरणबद्ध समाप्त होना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह कई वित्त आयोगों द्वारा पहले से तय प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। राज्य सरकार को इसकी पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद वैकल्पिक राजस्व स्रोत बढ़ाने और खर्च पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की तुलना उत्तराखंड से करते हुए कहा कि दोनों राज्य पर्वतीय, सीमित संसाधनों और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाले हैं, लेकिन उत्तराखंड ने बेहतर राजस्व संग्रह, निवेश आकर्षण और वित्तीय अनुशासन का परिचय दिया है। वहीं हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा और कर्ज अनुपात तेजी से बढ़ा है, जो नीति और प्रबंधन की कमजोरियों को दर्शाता है। टंडन ने दावा किया कि सार्वजनिक वित्तीय आकलनों के अनुसार हिमाचल प्रदेश का कर्ज अनुपात 40 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जो गंभीर चेतावनी का संकेत है। इसके विपरीत केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय और आधारभूत संरचना में निवेश बढ़ाते हुए भी अपने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित कर लगभग 4.3 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने ओएसडी, सलाहकारों और राजनीतिक नियुक्तियों की संख्या बढ़ाकर राजस्व व्यय पर अनावश्यक बोझ डाला है। कई विभागों में सलाहकारों को लाखों रुपये मासिक वेतन, वाहन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। टंडन ने कहा कि पहले सरकार ने अपने घर का बजट नहीं संभाला और अब वित्तीय संकट के लिए केंद्र को दोष दे रही है। संजय टंडन ने कहा कि केंद्र सरकार की अधिकांश योजनाएं—शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, ग्रामीण विकास, जल और कृषि—90:10 फंडिंग मॉडल पर चलती हैं। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाया गया, जबकि वर्तमान सरकार परियोजना तैयारी और पहल में पिछड़ गई है। उन्होंने अधिकारियों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाकर भय और भ्रम का वातावरण बनाने को गलत बताया और कहा कि यदि सरकार के पास ठोस तथ्य हैं तो मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर जवाब दें। केंद्र सरकार ने कभी भी हिमाचल प्रदेश की मदद से पीछे हटने का काम नहीं किया है।
केंद्रीय बजट 2026 पर बोलते हुए संजय टंडन ने कहा कि यह बजट क्रांतिकारी, दूरदर्शी और परिवर्तनकारी है, जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है और देश विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने बताया कि सकल एनपीए लगभग 11 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत से नीचे आ गया है, नेट एनपीए 1 प्रतिशत से कम है, 60 करोड़ से अधिक बैंक खाते सक्रिय हैं और वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का करीब 49 प्रतिशत भारत में हो रहा है। बजट में पूंजीगत व्यय के लिए लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। टंडन ने कहा कि बजट में युवाओं, महिलाओं, किसानों, एमएसएमई, उद्यमियों और निवेशकों के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं। आयकर प्रणाली को सरल बनाया गया है, इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, सड़क, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर रिकॉर्ड निवेश का प्रावधान किया गया है।
अंत में उन्होंने कहा कि जहां केंद्र सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ विकास का मॉडल प्रस्तुत कर रही है, वहीं हिमाचल की कांग्रेस सरकार कुप्रबंधन और दोषारोपण की राजनीति कर रही है। जनता सब देख रही है और समय आने पर उचित जवाब देगी।

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