चंडीगढ़। मिनर्वा एकेडमी की अंडर-14 फुटबॉल टीम ने इतिहास रच दिया है। इस टीम ने 2025 में दुनिया के चार सबसे बड़े और प्रतिष्ठित युवा फुटबॉल टूर्नामेंटों में भाग लिया और एक ही साल में तीन में चैंपियन बनकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह एक अभूतपूर्व उपलब्धि है, जिसे पहले किसी भी टीम ने हासिल नहीं किया था। मिनर्वा एकेडमी ने सिर्फ तीन हफ्तों के भीतर दुनिया के तीन सबसे बड़े युवा टूर्नामेंट - वर्ल्ड यूथ कप (गोथिया कप), डाना कप और नॉर्वे कप - में जीत हासिल की। इसके अलावा, वे हेलसिंकी कप के फाइनल में भी पहुंचे, जिससे वे एक ही साल में इन चारों प्रमुख वैश्विक युवा टूर्नामेंटों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम बन गए।
इस दौरान टीम ने कई चौंकाने वाले रिकॉर्ड भी बनाए:
अपराजित रहे : अपनी तीन खिताबी जीत के दौरान टीम ने कुल 26 मैचों में कोई हार नहीं झेली।
सबसे बड़ी जीत : उन्होंने डाना कप और नॉर्वे कप के फाइनल में 50 साल के इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।
सबसे तेज़ गोल : नॉर्वे कप में टीम ने किकऑफ के सिर्फ 3.8 सेकंड बाद टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे तेज़ गोल दागा।
टीम का शानदार प्रदर्शन
यह जीत सिर्फ कुछ खिलाड़ियों की वजह से नहीं थी, बल्कि यह टीम के एकजुट प्रयास का परिणाम था। टीम के कई खिलाड़ियों ने गोलों की बौछार कर दी, जिसमें वाहेंगबाम राज सिंह (60 गोल), पुनशीबा मेइतेई (33 गोल), और डेनामोनी (26 गोल) प्रमुख थे। मिडफ़ील्ड और डिफेंसिव खिलाड़ियों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह सफलता रातोंरात नहीं मिली। यह वर्षों के अथक प्रशिक्षण, स्काउटिंग और कड़ी मेहनत का नतीजा है। मिनर्वा एकेडमी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय फुटबॉलर्स भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का मुकाबला कर सकते हैं। यह टीम सिर्फ चैंपियन नहीं है, बल्कि भारतीय फुटबॉल के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है।